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क्या आप जानते हैं TV पर बार-बार क्यों दिखाई जाती है अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘सूर्यवंशम’

हिंदी सिनेमा की दुनिया में दो तरह के लोग हैं. पहले, जिन्होंने ‘सूर्यवंशम’ देखी है. दूसरे, जो झूठ बोलते हैं कि उन्होंने ‘सूर्यवंशम’ नहीं देखी. 21 मई, 2021 को ‘सूर्यवंशम’ ने अपनी रिलीज़ के 22 साल पूरे किए. आज हम आपको प्रो-फेमिनिस्ट, लोरीबाज़, स्टार्ट अप किंग हीरा ठाकुर की गौरवगाथा बयां करती इस फिल्म के कुछ किस्से बताएंगे.

हीरा ठाकुर के लिए अमिताभ नहीं थे पहली चॉइस :- 90 के दशक में अमिताभ बच्चन का फिल्मी करियर बुरी तरह चरमरा गया था. 1992 में आई ‘खुदा गवाह’ के बाद लंबे समय तक उनकी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी नसीब नहीं हुई। अपनी फिल्म प्रॉडक्शन कंपनी खोली, लेकिन वहां भी घाटा हुआ. अपने प्रॉडक्शन बैनर तले रिलीज़ हुई ‘मृत्युदाता’ से अपना करियर रिवाइव करने की सोची. लेकिन फिल्म बुरी तरह पिटी. थिएटर में लोग भरने को तरसती दिखी. लगाया हुआ पैसा डूब गया।

आगे आई ‘बड़े मियां छोटे मियां: और ‘मेजर साब’ ने करियर को थोड़ा संभाला. लेकिन कायापलट कर देने वाली सक्सेस नहीं दिला पाईं. फिर ऑफर हुई ‘सूर्यवंश’. जो 1997 में आई तमिल फिल्म ‘सूर्यवम्सम’ का हिंदी रीमेक थी. बना रहे थे तेलुगु कमर्शियल सिनेमा के सफल डायरेक्टर ईवीवी सत्यनारायण. फिल्म की यूनिट और ज़्यादातर कलाकार साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री से थेकहानी पिता और बेटे के खींचतान भरे रिश्ते की.

अमिताभ ने ही फिल्म में पिता और बेटे, दोनों का किरदार निभाया. जब उन्हें फिल्म ऑफर हुई, तब उनकी उम्र थी 56 साल. मेकर्स बेटे के रोल के लिए किसी जवान एक्टर को कंसिडर करना चाहते थे. अभिषेक बच्चन का नाम उनकी लिस्ट में टॉप पर था. लेकिन किसी वजह से बात नहीं बनी. और बेटे का रोल भी अमिताभ के ही हिस्से आ गया. अमिताभ को इस फिल्म से बड़ी उम्मीद थी. साथ ही वो साउथ इंडस्ट्री के कलाकारों के साथ काम करने को भी उत्सुक थे.

उनके मुताबिक साउथ इंडस्ट्री के लोग हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की तुलना में ज़्यादा अनुशासित होते हैं. खैर, फिल्म रिलीज़ हुई. ‘सूर्यवंश’ नहीं बल्कि, ‘सूर्यवंशम’ के टाइटल से. फिल्म कोई भी करिश्मा दिखा पाने में नाकाम रही. क्रिटिक्स से ठीक-ठाक रिव्यूज़ मिले. लेकिन ऑडियंस ने फिल्म को नहीं अपनाया.

‘सूर्यवंशम’ की मेकिंग के दौरान दिए इंटरव्यू में सौंदर्या ने ये कहा था. सौंदर्या. 90 के दशक की हिट तेलुगु फिल्म एक्ट्रेस. तेलुगु समेत तमिल, कन्नड और मलयालम भाषी फिल्मों में काम किया. मोहनलाल, रजनीकांत, वेंकटेश, नागार्जुन और कमल हासन जैसे सुपरस्टार्स के साथ. तेलुगु सिनेमा में अपार सफलता देखने के बाद सौंदर्या को हिंदी फिल्म ऑफर हुई.सूर्यवंश’. पता चला कि उनके साथ लीड में अमिताभ बच्चन हैं. ये सुनकर उन्हें यकीन नहीं हुआ. सपने जैसा प्रतीत हुआ.

अपने स्कूली दिनों में सौंदर्या संस्कृत की स्टूडेंट थीं. इसलिए उन्हें हिंदी पढ़ने और लिखने में कोई दिक्कत नहीं होती थी. ऊपर से अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका. तो उन्होंने झट से हां कर दी. फिल्म में उनका रोल अमिताभ के बेटे वाले किरदार यानी हीरा ठाकुर की पत्नी राधा का था. फिल्म से जुड़े बाकी लोगों की तरह सौंदर्या को भी उम्मीद थी कि फिल्म तगड़ा बिज़नेस करेगी.लेकिन ऐसा हुआ नहीं. परिणामवश, सौंदर्या के मन में हिंदी सिनेमा को एक्सप्लोर करने की इच्छा खत्म हो गई. फिर से तेलुगु सिनेमा का रुख कर लिया.

1999 में आई ‘सूर्यवंशम’ उनके 12 साल लंबे फिल्मी करियर की इकलौती हिंदी फिल्म साबित हुई. इसकी वजह थी 2004 में हुई उनकी अकस्मात मृत्यु. 2004 में आंध्रप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले थे. उसी दौरान सौंदर्या करीमनगर से बीजेपी उम्मीदवार विद्या सागर राव के लिए चुनाव प्रचार कर रही थीं. 17 अप्रैल की तारीख थी. उस वक्त सौंदर्या बेंगलुरू में थीं. उनके एयरक्राफ्ट ने जक्कूर एयरोड्रम से उड़ान भरी. एयरक्राफ्ट 100 फीट ऊपर पहुंचकर बुरी तरह हिलने लगा. और फिर कुछ सेकंड के अंदर ज़मीन पर आ गिरा. गिरने के बाद एयरक्राफ्ट में धमाका हुआ. अंदर मौजूद सभी लोग बुरी तरह जल गए. लाशों को पहचान पाना तक नामुमकिन था.

जो भानू प्रताप को ज़हरीली खीर खिला दे, वो बच्चा कोई आम नहीं ‘सूर्यवंशम’ के जरिए मेकर्स कोई सोशल मैसेज नहीं देना चाहते थे. मतलब उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं थी. बावजूद इसके उन्होंने एक मैसेज दे ही डाला. कि हमेशा खीर को चेक कर के खाना चाहिए. खासतौर पर अगर खिलानेवाला कोई बच्चा हो. फिल्म में ठाकुर भानू प्रताप को खीर खिलाई थी उनके तेजस्वी पोते ने. इधर ठाकुर साहब ने खीर खाई, लगे खून की उल्टियां करने. और उधर मीमर्स का ‘अभी मज़ा आएगा न भीड़ू’ मोमेंट आ गया.

खैर, मीमर्स की दुकान चलाने और भानू प्रताप और हीरा ठाकुर के रिश्ते सुधारने का क्रेडिट इस बच्चे को ही जाता है. जिसका रोल निभाया था पीबीएस आनंद वर्धन ने. आनंद की पहचान भले ही ‘सूर्यवंशम’ वाले बच्चे के तौर पर बन गई हो. लेकिन बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट, आनंद ने करीब 25 फिल्मों में काम किया. दरअसल, आनंद के दादा पीबी श्रीनिवास पहुंचे हुए सिंगर थे. दादा की इच्छा थी कि पोता आगे जाकर एक्टर बने. दादा की बदौलत घर पर फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का आना-जाना भी लगा रहा था.

दादा की मनोकामना पूरी हुई. जब महज़ तीन साल की उम्र में आनंद को अपनी पहली फिल्म मिली. फिल्म थी तेलुगु भाषी ‘रामायणम’. लेकिन इसके बाद आई ‘प्रियारागलु’ उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म साबित हुई. फिल्म में अपने काम के लिए उन्होंने नंदी अवॉर्ड फॉर द बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट भी जीता था. कुछ साल फिल्में करने के बाद आनंद ने पढ़ाई पर फोकस करना बेहतर समझा. और इस तरह 13-14 साल की उम्र तक आते-आते वो सिल्वर स्क्रीन से गायब हो गए.

आखिर टीवी पर हमेशा क्यों आती है Sooryavansham? 1991 से पहले इंडियन टेलिविज़न पर एक ही चैनल था. दूरदर्शन. एक पब्लिक चैनल. 90 के दशक में नरसिम्हा राव सरकार ने प्राइवेटाइज़ेशन के रास्ते खोल दिए. और इसी के साथ एंट्री हुई प्राइवेट प्लेयर्स की. प्राइवेटाइज़ेशन की बदौलत 20 जुलाई 1999 को एक नया चैनल ब्रॉडकास्ट हुआ. नाम था ‘सेट मैक्स’. सोनी मैक्स तो ये आगे जाकर कहलाया. 1999 में ही ‘सूर्यवंशम’ भी रिलीज़ हुई थी. ऐसी फिल्म जो आगे जाकर मैक्स की पर्यायवाची बनकर सिद्ध हुई.

इतनी बार जो टेलीकास्ट होती है चैनल पर. चैनल और फिल्म के ऐसे अनोखे प्रेम पर कितने ही मीम्स बने. कि लाइफ में कुछ और पर्मानेंट हो या नहीं, लेकिन मैक्स पर सूर्यवंशम पर्मानेंट है. जैसे सेट मैक्स और सूर्यवंशम की लव स्टोरी ट्वाइलाइट से तो बेटर ही है आदि.खैर, इंटरनेट पर मौजूद बुद्धिजीवियों ने इस गुत्थी को सुलझाने का ठेका लिया. कि आखिर ‘सूर्यवंशम’ टीवी पर बार-बार क्यों आती है. जल्द ही इंटरनेट पर आर्टिकल घूमने लगे. जहां दावा किया गया कि सेट मैक्स ने 1999 में 100 सालों के लिए ‘सूर्यवंशम’ के टीवी राइट्स खरीद लिए थ

. इसलिए ये फिल्म लगातार सेट मैक्स पर आती रहती है. लेकिन असल बात ये नहीं. मार्केटिंग माइंड ने इस बारे में सेट मैक्स से कॉन्टैक्ट किया. चैनल ने बताया कि ये शायद कोई प्रैंक है. क्योंकि उन्होंने 100 सालों के लिए कोई राइट्स नहीं खरीदे. वो फिल्म इसलिए दिखाते हैं, क्योंकि आप देखते हैं. यही जवाब था चैनल का. लोगों को ‘सूर्यवंशम’ पसंद है. इसलिए चैनल दिखाता है. बाबू, डिमांड-सप्लाई का सीन है सारा.

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