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स्वच्छ 2021:जम्मू से पहले टॉपर बने तन्मय गुप्ता, मेडिकल प्रवेश परीक्षा में लाए 720 में 720 अंक

जम्मू की धरती से पहली बार (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा)स्वच्छ परीक्षा का टॉपर निकला है. तन्मय गुप्ता (Tanmay Gupta) नामक छात्र नेस्वच्छ2021 में 720 में 720 अंक लाकर पूरे क्षेत्र को गर्व करने की वजह दे दी.

देश के नामचीं मेडिकल कॉलेज में सीट पक्की
NEET 2021 में मृणाल कुट्टेरी, कार्तिका जी नायर और तन्मय गुप्ता को पूरे अंक मिले. तन्मय अपना रिज़ल्ट नहीं देख पा रहे थे, साइट में कुछ दिक्कतें आ रही थी. उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा जब उसके पिता ने फ़ोन कर के बताया कि उसे परीक्षा में फ़ुल मार्क्स मिले हैं.

18 वर्षीय तन्मय गुप्ता ने News18 से बातचीत में कहा, “मैं बार-बार मेल देख रहा था क्योंकि साइट पर कुछ पता नहीं चल रहा था. साइट शायद क्रैश हो गई थी, जब मेरे पिता ने कॉल किया तो मैं ख़ुशी से झूम उठा. मुझे विश्वास करने में थोड़ा समय लगा कि मैंने टॉप किया है. मैं बहुत एक्साइटेड महसूस कर रहा था.”

आम और ख़ास ने दी बधाई
तन्मय को उनकी सफ़लता के लिए हर तरफ़ से शुभाशिष मिले. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दी. कश्मीर के लेफ़्टिनेंट जनरल (Lieutenant General, LG) मनोज सिन्हा से लेकर कई ब्यूरोक्रेट्स ने तन्मय की पीठ थपथपाई.

प्रॉपर प्लानिंग और माता-पिता के साथ से हासिल किया मक़ाम
तन्मय ने ये सफ़लता दो मंत्रों से हासिल की- प्रॉपर प्लानिंग और माता-पिता का साथ. तन्मय बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में आगे रहे. 10वीं के बाद वो अच्छी शिक्षा और सटिक कोचिंग के लिए दिल्ली आ गए.

तन्मय ने बताया, “मैंने अपने पिता से कहा कि जम्मू से बाहर जाकर पढ़ाई करने से मेडिकल सीट्स पक्की हो सकती है. पापा मान गए और मेरे निर्णय का समर्थन किया.”

2 साल दिल्ली में रहकर की तैयारी
तन्मय ने 2 साल दिल्ली में रहकर तैयारी की. तन्मय ने प्राइवेट कोचिंग संस्थान से कोचिंग की. बड़े शहर का एक्सपोज़र और साथी छात्रों की मदद से तन्मय ने सफ़लता पई.

तन्मय और उसके घरवालों को लग रहा था कि उसे 680 से 700 के बीच अंक मिलेंगे, किसी ने नहीं सोचा था कि वो टॉपर बनेगा.

किताबी कीड़ा नहीं हैं तन्मय
तन्मय किताबों में घुसे रहने वाले छात्र नहीं हैं. बीते दो सालों में उन्होंने सही प्लानिंग से पढ़ाई की और यही उनकी सफ़लता का राज़ है. तन्मय ने बताया, “कोचिंग के बाद 4-5 घंटे सेल्फ़ स्टडी की लेकिन मैंने एक रूटीन फ़ॉलो किया. मैं सुबह गोल्स बनाता और शाम तक उन्हें पूरा करता. मैंने रात को जागकर पढ़ाई नहीं की और 10 बजे पढ़ाई बंद कर देता था. इस वजह से अगले दिन कोई परेशानी नहीं होती थी.”

पढ़ाई से बोरियत होने पर तन्मय स्वीमिंग करते या दोस्तों से मिलते थे.
तन्मय ने कहा, “कन्सेट्रेशन भटकने पर मैं किताब पढ़ता या टीवी देखता. मैंने ओलंपिक गेम्स भी देखे.”

तन्मय अभी MBBS डिग्री पूरी करना चाहते हैं और आगे क्या करना है ये उसके बाद सोचेंगे. तन्मय ख़ुद को डॉक्टर के सफ़ेद कोर्ट में देखना चाहते हैं.

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